एक कछुए और दो हंसों की कहानी

By | 8th April 2017

एक समय की बात है। एक कछुआ और दो हंस बड़ी खुशी-खुशी रहते थे। हंसों को कछुए की मदद से रोज मछलियांं खाने को मिलती थीं। दोनों हंस कछुए को दोस्त मानते थे और उससे मिलने तालाब तक आते रहते थे। एक साल सूखा पड़ा, तो सारे तालाब सूख गये। जानवर पानी के अभाव में मरने लगे। तब बहुत सारे जानवरों ने दूसरी जगह जाना तय किया, जहाँ पर पानी हो। तीनो दोस्त, कछुआ और हंसों ने भी उस तालाब को छोड़ कर किसी ऐसी जगह जाने का विचार किया, जहाँ पानी भी और तीनों को भोजन भी मिल सके। पर सवाल यह था कि तीनों दोस्त किसी दूसरी जगह जाएं कैसे। हंसों के लिए तो यह आसान बात थी, लेकिन कछुए के लिए यह बहुत कठिन कार्य था। हंसों ने कछुए के बगैर जाने से मना कर दिया। काफी सोच-विचार के बाद एक हंस ने तरीका सोचा। अगर कछुआ अपने दांतों से लकड़ी के डंडे को पकड़ ले, तो डंडे के दोनों किनारों को हंस अपने मुँह में दबा कर उसे उड़ा ले जा सकते हैं। लेकिन इसमें केवल एक ही शर्त थी, कि कछुआ कुछ देर तक कुछ भी न बोले, क्योंकि अगर वह बोला, तो गिर जाएगा और मर जाएगा।

दोनों हंस बहुत चिंतीत थे, क्योंकि कछुए के लिए चुप रहना बहुत मुश्किल था। वह बहुत बातूनी था। कछुए को बात समझ में आई और उसने प्रतिज्ञा की कि वह पूरे रास्ते बिल्कुल चुप रहेगा। यात्रा शुरू करने के पहले हंसो ने फिर से अपने मित्र कछुए को समझाया कि किसी भी स्थिति में अपना मुँह न खोलना। सख्त हिदायत देकर हंसों ने अपनी चोंच में लकड़ी पकड़ ली और कछुए ने बीच से वह लकड़ी कस के अपने मुँह में दबा ली। वे तीनों पहाड़, खेत, मैदान को पार करते चले जा रहे थे। कछुआ भी आसमान में उड़ने के मजे ले रहा था।

वे अपना आखिरी शहर पार कर रहे थे और बस कुछ ही देर में अपनों मंजिल तक पहुँचने ही वाले थे। इतने में शहर के लोगों ने उन तीनों को उड़ते देख लिया। ऐसा नजारा देखकर सब बहुत आश्चर्यचकित हो गए उर तालियां बजाने लगे। कछुए का मन मचलने लगा। वह भी नीचे देखना चाहता था। उसने अपने हाथ से हंसों को कई इशारे किये, लेकिन हंस एकदम एकाग्रता से अपना पूरा ध्यान उड़ने पर केंद्रित किये हुए थे। कछुए के कई प्रयास करने के बाद भी जब हंसों ने नहीं सुना, तो कछुआ चिल्लाया, रोको। लेकिन चिल्लाने के लिए जैसे ही उसने मुँह खोला, उसके मुंह से लकड़ी छूट गयी और वह सीधा धरती पर औंधे मुंह गिरा।

"लक्ष्य से ध्यान भटकने से सफलता नहीं मिलती और मुसीबत आती है।"

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *